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साहित्य के ‘ब्लैक हॉर्स’ हैं कृपाशंकर : उपन्यासकार जयनंदन

सारा जहां ब्यूरो।

जमशेदपुर : शहर में आयोजित एक गरिमामय साहित्यिक समारोह में कथाकार और पत्रकार कृपाशंकर को ‘प्रो. राघव आलोक सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान हर वर्ष ऐसे साहित्यकार को प्रदान किया जाता है, जो साहित्य की मुख्यधारा से अलग हटकर मौलिक और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के वरिष्ठ कथाकार एवं उपन्यासकार जयनंदन ने कृपाशंकर की लेखकीय यात्रा की सराहना करते हुए उन्हें “साहित्य का ब्लैक हॉर्स” बताया। उन्होंने कहा कि कृपाशंकर साहित्य की जोड़-तोड़ या गुटबाजी से दूर रहते हैं और पूरी निष्ठा के साथ अपनी रचनात्मक यात्रा जारी रखते हैं।

उन्होंने कहा, “ब्लैक हॉर्स वही होता है, जो शुरुआत में भले दिखाई न दे, लेकिन दौड़ में सबसे आगे निकल जाता है। साहित्य में कृपाशंकर की पहचान भी कुछ ऐसी ही है। उनकी हालिया कहानियों ने यह साबित कर दिया है कि वे हिंदी साहित्य में अपनी अलग और मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।” जयनंदन ने विशेष रूप से पत्रिका ‘किस्सा’ और ‘वर्तमान साहित्य’ में प्रकाशित कृपाशंकर की नई कहानियों का उल्लेख करते हुए उनकी रचनात्मक क्षमता की प्रशंसा की।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक अविचल ने प्रो. राघव आलोक के साहित्यिक योगदान और सम्मान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन रचनाकारों को समर्पित है, जो साहित्य में नए विचारों और संवेदनाओं को आगे बढ़ाते हैं।

हिंदी के चर्चित आलोचक सुधीर सुमन ने कृपाशंकर को प्रयोगधर्मी और ज़मीनी लेखक बताते हुए कहा कि उनकी कहानियां स्थापित ढांचों को तोड़कर नए विमर्श प्रस्तुत करती हैं। वहीं विद्वान लेखक अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ ने कृपाशंकर की सादगी, अनुशासन और लेखन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। कवि चंद्रकांत ने भी सम्मानित लेखक के व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर अपने विचार साझा किए।

कृपाशंकर लेखकीय वक्तव्य देते हुए

इस साहित्यिक आयोजन का संचालन उदय हयात ने किया, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी शहर के वरिष्ठ साहित्यकार अरविंद विद्रोही ने निभाई। समारोह की एक विशेष बात यह रही कि दिवंगत साहित्यकार प्रो. राघव आलोक की धर्मपत्नी रेखा आलोक और उनके परिवार के सदस्य भी पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे, जिससे आयोजन भावनात्मक और स्मरणीय बन गया।

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