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किंगफिशर ने कर्ज के धन का एक हिस्सा विदेशों में भेजा

नयी दिल्ली: किंगफिशर एयरलाइन्स ने सरकारी बैंकों से जुटाए गए 4,000 करोड़ रपये का एक हिस्सा कथित तौर पर कर चोरों की पनाहगाह समझे जाने वाले देशों को हस्तांतरित किया और कंपनी अब सीबीआई की जांच के घेरे में है।

सीबीआई ने इस मामले में कंपनी के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

सूत्रों ने दावा किया है कि कल तलाशी के दौरान एकत्रित सामग्री से संकेत मिलता है कि इस एयरलाइन ने 11 सरकारी बैंकों से लिए गए 4,000 करोड़ रपये के रिण का कुछ हिस्सा विभिन्न उद्देश्यों से कर चोरी के पनाहगाह माने जाने वाले देशों में भेजा, जबकि रिण के समझौतों में उनका उल्लेख नहीं था।

निजी क्षेत्र की इस एयरलाइन ने अक्तूबर, 2012 से उड़ानें बंद कर रखी हैं।

सूत्रों का दावा है कि सीबीआई आईडीबीआई बैंक से हासिल किए गए 900 करोड़ रपये के रिण के मामले की जांच का विस्तार अन्य 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के रिणों तक करेगी जिन्होंने कंपनी को 3,100 करोड़ रपये अतिरिक्त रिण दे रखा है।

उन्होंने कहा कि जांच एजेन्सी रिण का पैसा विभिन्न कारणों से विदेशों में भेजने के मामले की जांच पड़ताल करेगी।

उल्लेखनीय है कि किंगफिशर पर 17 बैंकों के कंसोर्टियम का 7,000 करेाड़ रपये से अधिक का बकाया है जिसमें अकेले एसबीआई का 1,600 करोड़ रपये से अधिक बकाया है। कंसोर्टियम के अन्य सदस्यों में यूको बैंक, पीएनबी, विजया बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, कारपोरेशन बैंक, बैंक आफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया, स्टेट बैंक आफ मैसूर और इंडियन ओवरसीज बैंक शामिल हैं।

सूत्रों ने कहा कि इन बैंकों को भी बताना होगा कि उन्होंने आंतरिक रिपोर्टों की अनदेखी कर इस एयरलाइन फर्म को रिण क्यों दिए। सूत्रों ने यह नहीं बताया कि एयरलाइन ने किन-किन देशों को धन हस्तांतरित किया।

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