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बंदरगाहों के विकास पर 70000 करोड़ रुपये निवेश होगा

नई दिल्ली: सरकार ने सोमवार को कहा कि बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रमुख बंदरगाहों पर 70 हजार करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। नए लक्ष्य की घोषणा यहां जहाजरानी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की, जिन्होंने यहां राष्ट्रीय सागरमाला सर्वोच्च समिति (एनएसएसी) की अध्यक्षता की।

गडकरी ने कहा, “प्रमुख बंदरगाहों के विकास पर करीब 70 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय परामर्शदाताओं से 104 सुझाव मिले हैं।”

उन्होंने कहा, “इनके कार्यान्वयन से माल ढुलाई तीन गुना बढ़ जाएगी। किराया घट जाएगा। अभी हमारा किराया चीन के मुकाबले तीन गुना अधिक है।”

उन्होंने कहा कि जहाजरानी और राजमार्ग देश के सकल घरेलू उत्पाद को दो फीसदी तक बढ़ा सकता है।

मंत्री ने कहा, “बंदरगाह आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बंदरगाह, जहाजरानी और राजमार्ग क्षेत्र जल्द ही जीडीपी को दो फीसदी तक बढ़ा देंगे।”

इस साल मार्च में सरकार ने सागरमाला परियोजना के सांस्थानिक ढांचे को मंजूरी दी थी, जिसके तहत एनएसएसी की स्थापना की गई थी।

एनएसएसी में राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति) आयोग के उपाध्यक्ष, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के मंत्री और 10 तटवर्ती राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं।

10 तटवर्ती राज्यों में हैं आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल।

राष्ट्रीय सागरमाला सर्वोच्च समिति (एनएसएसी) की यह प्रथम बैठक थी।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में जहां रेलवे की नौ फीसदी और सड़कों का छह फीसदी योगदान होता है, वहीं बंदरगाहों का अभी सिर्फ एक फीसदी ही योगदान होता है।

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