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लालू परिवारवाद तक सिमट कर रह गए हैं: अमित शाह

बेगूसराय (बिहार): भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह ने यहां बुधवार को कहा कि भाजपा आरक्षण की पक्षधर थी और आज भी है। उन्होंने कहा कि भाजपा आरक्षण में कोई बदलाव नहीं चाहती।

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद आज सामाजिक न्याय और बिहार के विकास की बात करते हैं परंतु सच्चाई यह है कि वे परिवारवाद तक सिमट कर रह गए हैं।

बिहार के बेगूसराय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग आरक्षण के मामले में झूठ बोलकर चुनाव को विकास के मुद्दे से भटकाना चाहते हैं। 

कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते हुए उन्होंने कहा कि बिहार का माहौल स्पष्ट है कि राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बात तो अलग, अकेले भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा।

भाजपा के 10 जिलों के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उन्होंने कार्यकर्ताओं से आपसी मनमुटाव छोड़कर जनता के पास जाने की अपील की और कहा कि यह समय बिहार में भाजपा का झंडा लहराने का है। 

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि जब मौनी बाबा (मनमोहन सिंह) विदेश जाते थे तब कोई पूछता नहीं था परंतु आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत के लिए हजारों लोग आते हैं। विदेशों में आज भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। 

उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान ‘चारा चोर’ लालू से होता था और आज उसी के साथ मिलकर नीतीश बिहार में सुशासन लाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही बिहार का विकास हो सकता है। 

शाह ने कहा, “भाजपा किसी नेता के आधार पर नहीं, किसी चुनावी लहर के आधार पर नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के परिश्रम के आधार पर चुनाव जीतती है। कार्यकर्ता लड़ाई के मैदान में जाएं और दुश्मन को परास्त कर बिहार में भाजपा का झंडा लहरा दें।”

उन्होंने कहा, “बिहार को जंगलराज से मुक्ति के लिए भाजपा ने आह्वान किया था, तब नीतीश कुमार भी साथ आए थे। भाजपा ने जंगलराज से मुक्ति के लिए बड़ा दिल रखते हुए नीतीश को सत्ता दे दी।”

उन्होंने कहा कि उस दौर में भाजपा कार्यकर्ताओं का अपमान होता था, लेकिन मान-सम्मान से ज्यादा बिहार की चिंता थी लेकिन आज नीतीश कुमार सत्ता सुख के लिए उसी लालू प्रसाद के साथ हो लिए। 

शाह ने कहा, “नीतीश ने अपने स्वभाव के अनुसार भाजपा की पीठ में खंजर घोंपा है। अपमान सहकर भी हमने राज्य को जंगलराज से दूर रखा।”

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