सिनेमा

78वां कान फिल्म समारोह -1 : डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह

अजित राय, कान, फ्रांस से
हॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनो ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थियेटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। समारोह की शुरुआत फ्रांस की युवा फिल्मकार एमिली बोनिन की फिल्म ‘पार्टीर अन जूर’ (लीव वन डे) के प्रदर्शन से हुई।

इससे पहले लियोनार्डो डिकैप्रियो ने मशहूर हॉलीवुड सुपरस्टार राबर्ट डिनिरो को आनरेरी पाल्मा डोर से सम्मानित किया। इस अवसर पर जूलियट बिनोश की अध्यक्षता वाली जूरी का परिचय कराया गया, जिसमें भारतीय फिल्मकार पायल कपाड़िया भी शामिल हैं। उनकी फिल्म ‘आल वी इमैजिन ऐज लाइट’ को पिछले साल कान फिल्म समारोह का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार गैंड प्रिक्स दिया गया था। कान फिल्म समारोह के 78 सालों के इतिहास में बहुत कम फिल्मकार हैं, जिन्हें मुख्य जूरी में आमंत्रित किया गया है। पायल कपाड़िया का जूरी में होना भारतीय सिनेमा के लिए बहुत बड़ी बात है।

हॉलीवुड स्टार लियोनार्डो डिकैप्रियो ने राबर्ट डिनिरो के सम्मान में कहा कि वे दुनिया भर के अभिनेताओं के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं। उन्होंने सिनेमा में अभिनय की परिभाषा बदल दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के युवा अभिनेताओं के लिए डिनिरो का काम देखना ही सबसे बड़ी ट्रेनिंग है कि कैसे किसी चरित्र का अभिनय करते हुए शारीरिक ट्रांसफार्मेशन संभव होता है। वे अभिनय में क्लासिक फैशन बन चुके हैं। उनका अभिनय देख-देख कर अभिनेताओं की कई पीढ़ियां सुपरस्टार बन चुकी है। उनके पिता एक मशहूर पेंटर थे और उन्हें बचपन में ही कला का साथ मिला। मार्टिन स्कारसेसे के साथ उनकी सिनेमाई साझेदारी बेमिसाल है, जो अभिनेता और निर्देशक के रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करती है। उन्होंने सिनेमा में आइकॉनिक कहानियों को बिना समझौता किए जिया है। डिकैप्रियो ने कहा कि उनके पिता डिनिरो की फिल्में दिखाने ले जाते थे। ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘गाडफादर- 2’, ‘डियर हंटर’, ‘किलर्स आफ द फ्लावर मून’ तथा दूसरी कई फिल्मों में उन्होंने बिना एक शब्द बोले जैसे फिल्म का मूल कथ्य कह दिया वह अद्भुत है। डिकैप्रियो ने राबर्ट डिनिरो के साथ मार्टिन स्कारसेसे की पिछली फिल्म ‘किलर्स आफ द फ्लावर मून’ के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय था।
राबर्ट डिनिरो ने अपने भाषण की शुरुआत ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अमेरिका से बाहर बनने वाले सिनेमा पर सौ प्रतिशत टेरिफ लगाने की घोषणा का विरोध करने से की। उन्होंने कहा कि इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यहां तक कहा कि सिनेमा की विश्व बिरादरी को ट्रंप के इस निर्णय के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें उनके खिलाफ वोट देकर उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहिए, जिससे लोकतंत्र सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोकतंत्र नरक में पहुंच चुका है और कला ख़तरे में है। डोनाल्ड ट्रम्प ने शिक्षा, संस्कृति और कलाओं के बजट में भारी कटौती कर दी है। दरअसल दुनिया भर के तानाशाह सबसे ज्यादा कला और सिनेमा से डरते हैं। यह केवल अमेरिका की ही समस्या नहीं है, सारी दुनिया में ऐसा हो रहा है। सिनेमा और कलाओं की आजादी खतरे में है और हम सबको एकजुट होकर इन कोशिशों का विरोध करना है। उन्होंने कान फिल्म समारोह के साथ अपने पचास सालों के जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि वे 1973 में पहली बार कान आए थे। तब से उन्होंने देखा है कि यह समारोह कला और सिनेमा में विचारों की आजादी को समर्पित है। समारोह में राबर्ट डिनिरो के साथ एक विशेष मास्टर क्लास आयोजित किया जा रहा है।

जूरी की अध्यक्ष जुलिएट बिनोश ने दुनिया भर में कला और कलाकारों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गाजा की फोटो जर्नलिस्ट फातिमा हसौन इसी 16 अप्रैल को एक मिसाइल अटैक में अपने परिवार के दस लोगों के साथ मर गईं। मरने के एक दिन पहले ही उन्हें पता चला था कि उसकी फिल्म कान फिल्म समारोह में चुन ली गई है। उन्होंने लिखा कि मृत्यु उनसे होकर गुजर गई। शूटर की गोली ने मुझे पार किया और मैं देवदूत बन गई। आज फातिमा को हमारे बीच होना था। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के फिल्मकारों को कलाकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ एक होकर लड़ाई लड़नी होगी। इस अवसर पर हॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार डेविड लिंच को श्रद्धांजलि दी गई।

समारोह में टाम क्रूज की नई फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल – द फाइनल रेकोनिंग’ के वर्ल्ड प्रीमियर की यहां खूब चर्चा है। इस फिल्म का निर्देशन क्रिस्टोफर मैकक्वेरी ने किया है। उनके साथ एक विशेष मास्टर क्लास भी आयोजित किया जा रहा है। कान फिल्म समारोह में पिछले साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वर्चुअल रियलिटी पर आधारित फिल्मों का एक नया खंड ‘इम्मर्सिव कंपीटिशन’ शुरू किया गया था, जो बहुत सफल रहा। इस बार भी इस खंड में नौ फिल्में दिखाई जा रही हैं। इन फिल्मों के अलावा, दृश्य-श्रव्य माध्यम और तकनीकी चमत्कार पर आधारित युवा प्रयोगकर्ताओं की कई परियोजनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

(अजित राय कला, साहित्य, रंगकर्म लेखन के क्षेत्र में सुपरिचित नाम हैं और “सारा जहां” के लिए नियमित रूप से लिखते हैं)

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