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छिपे वीटो, सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध कानूनों को विकृत करते हैं: भारत

संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तकनीकी बाधाओं का इस्तेमाल करने के कुछ स्थाई सदस्यों के तौर-तरीकों की आलोचना करते हुए कहा है कि परिषद की प्रतिबंध प्रणाली पहले से ही अपारदर्शी हैं और इस तरह के छिपे वीटो उन्हें और भी विकृत कर देते हैं।

भारत ने सुरक्षा परिषद से राज्येतर तत्वों के अभियोजन में पहल करने का भी आह्वान किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कल महिला, शांति और सुरक्षा पर खुली चर्चा में भारत के स्थाई प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने कहा, संघर्ष की स्थितियों में, राज्येतर तत्वांें के बढ़ते प्रभाव की समस्या से प्रभावी ढंग से निबटने के मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो बाध्यकारी और दंडात्मक उपायों से मुक्त रहते हैं।

मुखर्जी ने कहा कि परिषद को इस तरह के राज्येतर तत्वों की जांच और अभियोजन में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, और अपने प्रतिबंध प्रणालियों की अपारदर्शी प्रक्रियाआंे से निष्प्रभावी नहीं हों, जो टेक्नीकल होल्ड या ब्लाक के नाम से जाने जाने वाले छिपे वीटो से और भी विकृत हो गई हैं, जिन्हें कुछ स्थाई सदस्य बिना किसी जवाबदेही के उपयोग करते हैं। 

चीन ने इसी साल भारत के उस कदम को बाधित कर दिया था जिसमें विश्व निकाय के एक प्रस्ताव का उल्लंघन करते हुए मुंबई हमलों के सरगना और लश्कर ए तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को रिहा करने पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। मुखर्जी की यह टिप्पणी इसी पृष्ठभूमि में आई है।

इस साल जून में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति की एक बैठक में मुंबई हमलों के मामले में लखवी की रिहाई पर पाकिस्तान से स्पष्टीकरण मांग की गई थी, लेकिन चीनी प्रतिनिधियों ने इस आधार पर इस कदम को बाधित कर दिया कि भारत ने पर्याप्त सूचना प्रदान नहीं की है।

संयुक्त राष्ट्र सुरषा परिषद की प्रस्ताव संख्या 1325 की 15वीं सालगिरह पर परिषद ने एक नया मजमून स्वीकार किया है जिसमें उसने संबंधित संदभो के दायरे में अपने एजेंडा की सभी देश-केन्दि्रत स्थितियों में महिलाओं, शांति और सुरक्षा सरोकारों को समेकित करने का फैसला किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने अपनी टिप्पणियों में कहा, पंद्रह साल पहले, सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1325 ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा और लिंग के बीच बुनियादी रिश्ते को रेखांकित किया था।

मुखर्जी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को संघर्ष रोकने, संघर्ष निबटाने और संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण में नीति निर्धारण प्रक्रिया में महिलाओं की पूर्ण एवं सार्थक भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहिए। 

योशिता सिंह

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