कला/संस्कृति/साहित्य

लेखकों का विरोध तेज, पांच और रचनाकारों ने लौटाए अकादमी पुरस्कार

वड़ोदरा/चंडीगढ़/नई दिल्ली: गुजरात के लेखक गणेश देवी और पांच अन्य प्रख्यात लेखकों ने आज अपना-अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का फैसला किया जबकि कन्नड़ लेखक अरविंद मलगत्ती ने संस्था की आम परिषद से इस्तीफा दे दिया।

इसके साथ ही ‘बढ़ती असिहष्णुता’ और ‘साम्प्रदायिक’ माहौल पर साहित्यकारों के बढ़ते विरोध में यह लोग भी शामिल हो गए।

वड़ोदरा के रहने वाले देवी ने कहा कि वह नयनतारा सहगल, अशोक वाजपेयी और अन्य के साथ एकजुटता जाहिर करने के लिए अपना पुरस्कार लौटा रहे हैं जिन्होंने देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति के संकुचित होते दायरे और वैचारिक मतभेद के प्रति बढ़ती असिहष्णुता की निंदा करते हुए अपने पुरस्कार लौटाए हैं। देवी ने साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को संबोधित एक पत्र में कहा है कि भारत का महान विचार विविधता और विचारों में अंतर पर आधारित है।

दिल्ली के अमन सेठी ने कहा है कि वह भी 1993 में मिले साहित्य अकादमी पुरस्कार को लौटा रहे हैं। पंजाब से तीन और प्रख्यात लेखकों ने अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की आज घोषणा की।

तर्कवादी एमएम कलबुर्गी की हत्या पर साहित्य अकादमी की चुप्पी को लेकर साहित्यकारों ने विरोध तेज कर दिया है। अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि शीर्ष साहित्यिक संस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है और कहीं भी किसी लेखक या कलाकार पर हमले की निंदा करती है।  संस्था ने संविधान में निहित ‘मूल धर्मनिरपेक्ष मूल्यों’ और ‘सभी के जीवन के अधिकार’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।

पंजाब के प्रख्यात लेखक गुरबचन भुल्लर, अजमेर सिंह औलख और आत्मजीत सिंह ने नयनतारा सहगल, सारा जोसफ, उदय प्रकाश और अशोक वाजपेयी जैसे कई अन्य लेखकों की तरह अपना पुरस्कार लौटाने की रविवार को घोषणा की। उन्होंने मांग की है कि अकादमी अपने सदस्य कलबुर्गी और अन्य तर्कवादियों की हत्या के खिलाफ तथा दादरी कांड के मद्देनजर साम्प्रदायिक माहौल के खिलाफ अपना बयान जारी करे।

भुल्लर ने कहा कि वह देश के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिशों को लेकर चिंतित हैं। प्रख्यात कन्नड़ लेखक कुम वीरभद्रप्पा ने बेंगलुरु में कहा कि उन्होंने तर्कवादी एमएम कलबुर्गी की हत्या पर अकादमी के मौन और दादरी घटना के विरोध में पुरस्कार लौटाने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि वह देश में बनाए जा रहे साम्प्रदायिक माहौल को लेकर बहुत परेशान हैं। केंद्र सरकार एक धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक देश की प्रतिनिधि होने के तौर पर अपना कर्तव्य नहीं निभा रही है।

भुल्लर ने कहा कि हाल के समय में देश के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिशों और एक कार्ययोजना के तहत साहित्य और संस्कृति को खासतौर पर निशाना बनाए जाने ने उन्हें चिंतित कर दिया है। पंजाब के बठिंडा में जन्मे 78 वर्षीय भुल्लर को उनकी लघु कथा पुस्तक ‘अग्नि कलश’ के लिए 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।

प्रख्यात पंजाबी लेखक औलख ने कहा कि प्रगतिशील लेखकों, तर्कवादी लेखकों पर हमले और शिक्षा एवं संस्कृति के जबरन भगवाकरण से वह बहुत आहत हैं। उन्होंने कहा कि वह देश में बनाए जा रहे साम्प्रदायिक माहौल से परेशान हैं। पंजाबी थिएटर की जानी मानी शख्सियत आत्मजीत सिंह ने आज कहा कि वह अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों से देश में साम्प्रदायिक वैमनस्य की घटनाओं से वह बहुत आहत हैं।

अकादमी की और किरकिरी करते हुए अरविंद मलगत्ती ने प्रगतिशील विचारक एवं विद्वान कलबुर्गी की हत्या पर अकादमी की चुप्पी की निंदा की और इसकी आम परिषद से इस्तीफा दे दिया है।

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