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इस बार गणेशोत्सव पर जेल बंदियों की बनाई मूर्तियां!

रायपुर: छत्तीसगढ़ सहित पूरे भारतवर्ष में गुरुवार से गणेशोत्सव की धूम रहेगी। राज्य की राजधानी रायपुर में भी पिछले दो-तीन महीनों से गणेश प्रतिमाओं को आकार दिया जा रहा था, अब मूर्तियां फाइनल टच के साथ ही बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

गणेशोत्सव में पहली बार राजधानी के बंदियों द्वारा बनाई गई मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।

ऐसा पहली बार हो रहा है जब जेल बंदियों द्वारा बनाई गई मूर्तियां भी खुले बाजार में उपलब्ध होंगी। बताया जाता है कि बंदियों द्वारा बनाई गई मूर्तियों का लागत मूल्य जेल प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा। वहीं, बिक्री की राशि जेल फंड में जमा होगी। बचत राशि का भुगतान कैदियों को रिहाई के वक्त किया जाएगा।

फिलहाल प्रदेश के सबसे बड़े केंद्रीय जेल में बंदियों द्वारा बनाई गई गणेश की मूर्ति देखकर राजधानी की जनता में कौतूहल है। इससे पहले भी रायपुर केंद्रीय जेल में कैदियों द्वारा बनाई गई तरह-तरह की चीजें बेची जाती हैं। जैसे-रायपुर में कैदियों के हाथों बुने गए सूती के कपड़े पूरे छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ केंद्रीय जेल के बंदियों द्वारा संचालित मुगौड़ी सेंटर काफी प्रसिद्ध है।

छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड ने भी गणेश उत्सव को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को गणेश पूजन में मिट्टी की बनी मूर्तियों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने सभी नागरिकों से पानी के प्रदूषण को रोकने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय पूजा के लिए मिट्टी की बनी मूर्तियां बिठाने की अपील की है। इस सिलसिले में माटी कला बोर्ड ने राजधानी रायपुर और जिला मुख्यालय दुर्ग में 15 सितम्बर से 17 सितम्बर तक विशेष प्रदर्शनी-सह विक्रय का आयोजन किया है। रायपुर शहर में यह प्रदर्शनी पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय मार्ग (जी.ई. रोड) पर एन.आई.टी. के सामने लगाई गई। 

प्रदर्शनी में लोगों को प्लास्टर ऑफ पेरिस (पी.ओ.पी.) की मूर्तियों में लगे हानिकारक रसायनों से होने वाले नुकसान की जानकारी देकर उन्हें मिट्टी की बनी मूर्तियां खरीदने की सलाह दी गई। इन प्रदर्शनियों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए माटी शिल्पी ने अपनी मूर्तिकला का प्रदर्शन किया। 

जेल प्रशासन ने पहली बार यह पहल की है। जेल परिसर स्थित पेट्रोल पम्प के नजदीक मिट्टी की गणेश मूर्तियों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाए गए हैं, जहां 51 रुपये से लेकर 451 रुपये तक मूल्य की प्रतिमाएं आम जनता के लिए उपलब्ध रहीं।

रायपुर केद्रीय जेल के अधीक्षक के.के. गुप्ता ने बताया कि रायपुर जेल में कैदियों द्वारा पहली बार गणेश की मूर्ति बनाई गई है। इसे बेचने के लिए जेल पुलिस द्वारा स्टॉल भी लगाए गए। उन्होंने बताया कि गणेश की मूर्ति बनाने में जो लागत आई है उसे जेल प्रशासन द्वारा वहन किया गया है, लेकिन मूर्तियों को विक्रय कर लागत राशि जेल के फंड में जमा करा दी जाएगी। साथ ही बचत राशि का भुगतान कैदियों को रिहाई के वक्त किया जाएगा।

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