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मानसिक समस्याओं के रोगियों के लिए ‘ई कंसल्टेंसी’ 

नई दिल्ली: भारतीय समाज में कई संवेदशील मुद्दों पर बातचीत की पहल भले ही शुरू हो चुकी हो लेकिन आज भी मानसिक रोग एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में बताने से लोग कतराते हैं। कितने लोग हैं जो बिना किसी शर्म या झिझक के इस बात को स्वीकारते हैं कि वे किसी मानसिक समस्या से गुजर रहे हैं?

समाज में उपहास का पात्र बनने का डर उन्हें अपनी इस समस्या का सामाधान करने से रोक लेता है। सच्चाई को स्वीकार करके और उसके समाधान के लिए कदम बढ़ाकर जिंदगी को आसान और खुशहाल बनाया जा सकता है। 

नेशनल केयर ऑफ मेडिकल हेल्थ द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक बिना शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के अंतर के भारत के कम से कम 6.5 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में गंभीर मानसिक समस्या से ग्रस्त हैं 

मन के तारों की उलझनों को सुलझाने के लिए बेहद जरूरी है कि किसी भी अन्य रोग की तरह इसमें भी समय रहते विशेषज्ञ की मदद ली जाए। समय पर उपचार न लेने पर किसी भी अन्य रोग की तरह मानसिक समस्या भी उग्र रूप ले सकती है जिसका प्रभाव मन पर ही नहीं शरीर पर भी पड़ता है। 

मानसिक इलाज के लिए आगे आने की मरीजों की इसी हिचक को देखते हुए अब कई स्वस्थ्य विशेषज्ञों ने ऑनलाइन सलाह के रूप में इसका समाधान ढूंढने का प्रयास किया है। इसी दिशा में कई वेबसाइट्स ने उपभोक्ताओं की निजी जानकारियों को गुप्त रखते हुए उन्हें ई कंसल्टेंसी की सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की है। 

मोबाइल प्लेटफॉर्म पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाले ऐसे ही ऑनलाइन हेल्थ केयर प्लेटफॉर्म ‘लाइबेट्र’ के सीईओ सौरभ अरोड़ा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ” जिस समस्या का निवारण उसकी शुरुआत में ही हो सकता है केवल झिझक और शर्म के कारण वह गंभीर समस्या बन जाती है।”

अरोड़ा ने कहा, “हमें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई मानसिक समस्याओं से जुड़े प्रश्न मिलते हैं लेकिन आमतौर पर सबसे ज्यादा सवाल मनासिक अवसाद, बाईपोलर डिसऑर्डर और साइकोसिस से संबंधित होते हैं।”

अरोड़ा के मुताबिक, “तेज रफ्तार से दौड़ती जिंदगी और उसके दबाव के कारण आमतौर पर हर व्यक्ति जीवन के किसी न किसी मुकाम पर अवसाद का शिकार हो जाता है। कुछ इसका मुकाबला करके इससे बाहर आ जाते हैं तो कुछ इसमें घिरते ही चले जाते हैं। ऐसे मे लाइबेट्र जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मरीजों को सुविधाएं देते हैं कि वे खुलकर अपनी समस्या के बारे में विशेषज्ञों से बातचीत करें और समय रहते उसका उपचार लें।”

ममता अग्रवाल

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