कला/संस्कृति/साहित्य

नाटक बिदेसिया में दिखी नारी विरह

  • बिदेसिया ने उभारी पलायन-विरह की टीस
  • सशक्त अभिनय ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
  • खगौल के बालिगा स्कूल में भव्य और जीवंत मंचन

खगौल।

नाट्य संस्था सूत्रधार, खगौल द्वारा भिखारी ठाकुर द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध नाट्य कृति ‘बिदेसिया का मंचन’ रविवार को बालिगा विद्यालय, खगौल के मुक्ताकाश मंच पर किया। कलाकारों के जीवंत अभिनय, जानदार संगीत और मंच एवं प्रकाश परिकल्पना ने हृदय छू लिया। बता दें कि भिखारी ठाकुर वरिष्ठ पुरस्कार (रंगमंच) और जाने-माने रंग निर्देशक नवाब आलम के निर्देशन में सूत्रधार, खगौल के कलाकारों द्वारा इस कालजयी नाटक की प्रस्तुति हुई।

यह नाटक गांव और छोटे शहरों से होने वाले पलायन की दर्द की कहानी है। यह भोजपुरी नाटक एक ऐसे युवक पर केंद्रित है, जो शादी के तुरंत बाद ही रोजगार की तलाश में कलकत्ता चला जाता है। बड़े शहर की चकाचौंध, उसे बाजार की तमाम विसंगतियों की ओर ले जाती है। विवाहित होने के बाद भी कलकत्ता में दूसरी शादी करके वही कलकत्ता रहने लगता है। कुछ समय बाद दूसरी पत्नी भी गांव पहुंच जाती है। तमाम लड़ाई-झगड़े के बाद नाटक के अंत में दोनों पत्नियां साथ रहने को तैयार हो जाती हैं। इस तरह एक सकारात्मक अंत के साथ नाटक समाप्त होता है।

पलायन की टीस, विरह और प्रेम वियोग को संवाद, गीत-संगीत के माध्यम से अभिनेताओं ने साकार रूप दिया है जो निश्चित ही एक खूबसूरत उपलब्धि है। बिदेसिया की मुख्य भूमिका में युवा अभिनेता चैतन्य निर्भय एवं नाटक की मुख्य नायिका साधना श्रीवास्तव ने दर्शकों को जैसे मंत्रमुग्ध कर दिया। साथी अभिनेताओं अंबुज कुमार, शालिनी श्रीवास्तव, अनिल कुमार सिंह, कुणाल कुमार, सुंदरम राज, धीरज कुमार, निशांत कुमार आदि ने सराहनीय अभिनय किया। साथ ही लोक संगीत ने भी आकर्षित किया। संगीत पक्ष में अखिलेश सिंह, कुमार नरेंद्र, लवकुश कुमार, राजीव रंजन त्रिपाठी, भोला सिंह, अभिजीत कुमार, शोएब कुरैशी ने जिम्मेदारी का पूरी तरह निर्वहन किया। पार्श्व मंच में जयप्रकाश मिश्रा (मेकअप), आसिफ हसन (मंच सामग्री), मुकेश कुमार (वेशभूषा), अरुण सिंह प्रकाश, जीशान आलम (प्रस्तुति नियंत्रक) आदि ने बागडोर संभाली।

मौके पर बरुण कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कला संस्कृति प्रकोष्ठ, बीजेपी, पटना बिहार; सुजीत कुमार, अध्यक्ष, नगर परिषद् खगौल; रंगप्रेमी मोहन पासवान; ज्ञानेश्वर, प्राचार्य, रेलवे स्कूल; प्रो. प्रसिद्ध यादव, साहित्यकार; रंगकर्मी अरुण सिंह; तनवीरूल हक; मो. सादिक; अस्तानंद सिंह; सामाजिक कार्यकर्ता चंदू प्रिंस; विकाश कुमार उर्फ पप्पू; अनीता पासवान; उदय गांधी; अनीता कुमारी; जितेंद्र वत्स; सुधीर मधुकर; वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक कुमार; पंचायत सचिव; पप्पू मुखिया; जमालउद्दीन चक; रूपेश कुमार; मो. शाहनवाज रिंकू; जोगेंद्र यादव, पैक्स अध्यक्ष; मुकेश; सऊद; शमशाद अनवर; मिथिलेश पांडे; यमुना प्रसाद; संतोष पांडे; मनोज सोनी सहित सैकड़ों की संख्या में बुद्धिजीवी, रंगकर्मी, पत्रकार एवं समाजसेवी मौजूद थे।

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